एक दोस्त ने हमसे कहा, तुम्हारी दोस्ती झूठी है; बरसों बीत गए उसे मनाते मनाते – वह फिर भी रूठी है। इन सालों में हवा के रुख बदल गए – वह कहती है हम अलग राह पर निकल गए। पर आज भी हम-तुम वही गीत गाते हैं, उसी तालाब उसी टीले पर जाते हैं। एक अकेला कैसे जोडे टूटे धागे? काश वो कहती, आओ साथ में नया धागा पिरोऍ।

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